WHO ने जारी की ‘दुनिया के सबसे आलसी देशों की रैंकिग’, कहा- ‘भारत के 34 प्रतिशत लोग एक्टिव नहीं’

New Delhi: किसी भी देश के नागरिक अपने कामों को लेकर कितना एक्टिव हैं, इस मुद्दे पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने एक रिपोर्ट जारी की है और बताया है कि किस देश के नागरिक सबसे ज्यादा आलसी हैं। WHO की ये रिपोर्ट सभी देश के नागरिकों की फिजिकल एक्टिवनेस से संबंधित है जिसको लेकर बकायदा एक सूची जारी की गई है और शीर्ष देशों की रैंकिंग की गई है।

मेडिकल जरनल ‘द लेनसेट’ में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अंतर्गत युगांडा को सबसे शीर्ष पर रखा गया और इस देश को सबसे ज्यादा ऊर्जावान देश करार दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस देश की सिर्फ 5.5 प्रतिशत जनता ही एक्टिवनेस से दूर है। वहीं इस सूची में कुवैत को सबसे आखिरी स्थान दिया गया और बताया गया है कि इस देश के 67 प्रतिशत लोग ना तो खास एक्टिव हैं और ना ही एक्सरसाइज जैसी तमाम फिटनेस एक्टिविटीज पर ध्यान देते हैं।

इतना ही नहीं, वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की इस नई रिपोर्ट के मुताबिक, 168 देशों में से लगभग 55 देश एकसरसाइज और फिजिकल एक्टिवनेस को लेकर पर्याप्त रूप से सजग नहीं हैं। वहीं 168 में से 159 देश ऐसे हैं, जहां महिलाओं की तुलना में पुरुषों ने एक्सरसाइज और दूसरी फिटनेस एक्टिविटीज में रुचि नहीं दिखाई है। इसके अलावा, WHO की रिपोर्ट ने यह भी माना है कि दुनियाभर के देशों के चार में से एक नागरिक ने एक्सरसाइज में रुचि नहीं दिखाई है।

जाहिर है कि दुनियाभर के देशों के सामने विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सिर्फ रिपोर्ट ही प्रस्तुत नहीं की है बल्कि आशंका जताई है कि ‘अगर रोजाना इंसान अपने शरीर को पर्याप्त गतिविधियों ना ढाल पाए तो गैर-संक्रमणीय बीमारियों की चपेट में आ सकता है।’ WHO की रिपोर्ट से सामने आए परिणाम किसी जोखिम को ही दर्शाते हैं क्योंकि पर्याप्त शारिरिक गतिविधियों में शामिल ना हो पाने का सीधा प्रभाव मानसिक स्वास्थ्य और जीवन जीने की क्वालिटी पर पडता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी 168 देशों की इस रिपोर्ट में भारत को 117वां स्थान दिया गया और बताया गया है कि यहां 34 प्रतिशत आबादी पर्याप्त रूप से एक्टिव नहीं है। इसके अलावा, कुवैत, अमेरिकी देश समेत सऊदी अरब और ईराक जैसे कई देशों की आधी से ज्यादा वयस्क वर्ग की आबादी ने एक्सरसाइज और फिजिकल एक्टीविटी में रुचि नहीं दिखाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी यह रिपोर्ट 1.9 करोड़ लोगों पर किए सर्वेक्षण के आधार पर जारी की है।