उपराष्ट्रपति बोले- राजनीतिक दलों के भीतर होना चाहिए अपना कोड ऑफ कंडक्ट

New Delhi. उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने कहा है कि संसद की कार्यवाही ठीक से चलाने और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए राजनीतिक दलों को अपने सांसदों के लिए एक कोड ऑफ कंडक्ट बनाने की जरूरत है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह एक विशेष नियम बनाने की जरूरत है।

रविवार को उपराष्ट्रपति ने अपनी किताब मूविंग ऑन मूविंग फॉरवर्ड का विमोचन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा सहित कई नेता मौजूद थे। इस किताब में उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति के तौर पर अपने एक साल के अनुभवों को उकेरा है।

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के साथ अपने सफर को याद करते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू अनुशासन के मामले में काफी सख्त हैं। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति ने कभी भी घड़ी नहीं पहनी लेकिन हमेशा वक्त के पाबंद रहे। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री ने विपक्षी दलों के नेताओं पर भी तंज कसा।

पीएम मोदी ने कहा कि आज देश में अनुशासन के साथ चलने वालों को विपक्षी दल के नेता अलोकतांत्रिक और तानाशाह बताते हैं। उपराष्ट्रपति ने इस मौके पर लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं में सुधार के कुछ बिंदु बताए। उन्होंने कहा कि अगर संसद या विधानसभा का कोई सदस्य अपनी पार्टी बदलना चाहता है तो उसे सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे सदस्यों को दल-बदल कानून के तहत तीन महीने के भीतर अपना इस्तीफा दे देना चाहिए।

इसके साथ ही उपराष्ट्रपति ने कहा कि सदन के सदस्यों को दल बदल कानून के प्रति सम्मान दिखाना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहा कि जिन राजनेताओं के उपर आपराधिक मामले दर्ज हैं उनके लिए सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की देखरेख में एक स्पेशल बेंच बनाकर त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए। उपराष्ट्रपति ने देश की मीडिया से भी अपील की कि मीडिया भड़काऊ और नकारात्मक बयानों के बजाय सकारात्मक और रचनात्मक बयानों पर ज्यादा ध्यान दे।

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