UN की टीम ने कहा- म्यांमार में हुआ था नरसंहार, आर्मी पर चले मुकदमा

New Delhi. संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था ने म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन के लिए वहां के आर्मी को दोषी माना है। सोमवारी को जारी किए गए रिपोर्ट में यूएन का कहना है कि म्यांमार के रखाईन प्रांत में नरसंहार की घटना घटी थी और इसे अंजाम देने वाले सेना के अधिकारियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

संस्था ने रोहिंग्या समुदाय के सैकड़ों लोगों से साक्षात्कार और सैटेलाइट फुटेज देखने के बाद यह रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मासूमों की जान लेने और बच्चियों के साथ गैंगरेप जैसी घृणित घटनाओं को भी अंजाम दिया गया है। इस टीम को म्यांमार के भीतर जाने की अनुमति नहीं मिली थी।

टीम में शामिल सदस्यों का कहना है कि म्यांमार के इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय में ले जाने की जरूरत है। पिछले हफ्ते ही म्यांमार की सरकार ने इस मामले को अंतर्राष्ट्रीय अपराध कोर्ट में ले जाने से इनकार कर दिया था। संयुक्त राष्ट्र की इस टीम ने रोहिंग्या मुसलमानों के साथ हुए हिंसा को जघन्य माना है।

गौरतलब है कि म्यांमार एक बौद्ध धर्म बहुल राष्ट्र है। यहां के रखाइन प्रदेश में रोहिंग्या समुदाय के मुसलमान रहते हैं। यहां बौद्ध बहुसंख्यकों और रोहिंग्या मुसलमानों में पहले भी विवाद होता रहा है। पिछले साल अगस्त महीने में रोहिंग्या समुदाय से जुड़े अराकन रोहिंग्या सॉल्वेशन आर्मी ने वहां की सेना पर कथित रूप से हमला कर दिया था। इसके बाद सेना की बर्बरतापूर्ण कार्रवाई सामने आई थी।

सेना की कार्रवाई से परेशान लोग अपनी जान बचाकर म्यांमार से भाग निकले। लाखों लोगों ने बांग्लादेश में शरण ली। इसके साथ ही भारत के भी कई हिस्सों में भी रोहिंग्या मुसलमानों ने शरण ली है। इस पूरे मामले पर म्यांमार सरकार का रवैया निराशाजनक रहा है। म्यांमार की सरकार का कहना है कि रोहिंग्या समुदाय के लोग यहां के मूल निवासी नहीं हैं बल्कि बांग्लादेश से आकर यहां बसे हैं।