शिवसेना ने मोदी सरकार से पूछा- आरक्षण तो दे दिया, लेकिन कहां हैं नौकरियां

Shivsena

New Delhi: एनडीए में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने सवर्ण आरक्षण को संसद से मंजूरी मिलने के बाद मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं।

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के संसद से मंजूरी मिलने के बाद शिवसेना ने गुरूवार को पूछा कि आरक्षण तो दे दिया लेकिन नौकरियां कहां से आएंगी। शिवसेना ने साथ ही चेतावनी दी अगर यह एक चुनावी चाल है तो यह महंगी साबित होगी।

शिवसेना ने कहा कि मराठा समुदाय को भी महाराष्ट्र में आरक्षण दिया गया है लेकिन सवाल अभी भी यही नहीं हुआ है कि नौकरियां कहां है। संसद ने बुधवार को समान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा और रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के एक संपादकीय में कहा है कि जब सत्ता में बैठे लोग रोजगार और गरीबी दोनों मोर्चों पर विफल होते हैं तब वे आरक्षण का कार्ड खेलते हैं। इसमें पूछा गया है अगर यह वोट के लिए लिया गया निर्णय है तो यह महंगा साबित होगा। 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद रोजगार का क्या होगा। आपको नौकरी कहां से मिलेगी।

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शिवसेना ने कहा कि भारत में 15 साल से अधिक उम्र के लोगों की आबादी हर महीने 13 लाख बढ़ रही है। 18 वर्ष से कम उम्र के नाबालिगों को नौकरी देना गुनाह है लेकिन बाल श्रम लगातार जारी है। सामना में कहा गया है कि देश में रोजगार की दर को संतुलित बनाए रखने के लिए गर साल 80 से 90 लाख नए रोजगारों की जरूरत है लेकिन यह गणित कुछ समय से अंसुतलित है।

शिवसेना कहा कि पिछले दो सालों में नौकरी के अवसर बढ़ने के बजाया कम हुए हैं। नोटबंदी और जीएसटी लागू किए जाने के कारण करीब 1.5 करोड़ से लेकर 2 करोड़ नौकरियां गई हैं। युवाओं में लाचारी की भावना है। मोदी सरकार पर चुटकी लेते हुए शिवसेना ने कहा कि सरकार के 10 प्रतिशत आरक्षण के बाद क्या योग्य युवा कुछ हासिल कर पाएंगे। युवाओं को पकौड़ा तलने की सलाह देने वाले प्रधानमंत्री को आखिरकार आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को 10 प्रतिशत आरक्षण देना पड़ा।