सर्वे में खुलासा- नौकरी चाहने वाले 80 फीसदी भारतीय राजनीति में बनाना चाहते हैं करियर

New Delhi: देश में तेजी से बढ़ रही बेरोजगारी के बीच नौकरी की तलाश कर रहे युवा राजनीति में अपने लिए करियर की संभावनाएं तलाश रहे है। दरअसल जॉब साइट Indeed ने एक सर्वे किया है। जिसमें नौकरी की तलाश कर 80 प्रतिशत युवाओं ने राजनीति या राजनीति से जुड़े पेशों में अपनी दिलचस्पी जताई है।

भारत की लीडिंग जॉब साइटों में से एक Indeed ने अपने सर्वे के माध्यम से दावा किया है कि भारत में नौकरी की तलाश कर रहे 80 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो राजनीति या उससे जुड़े पेशों जैसे राजनीतिक विश्लेषक, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक पत्रकार में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

Indeed ने अपने इस सर्वे में बेंगलुरू की एक प्लेसमेंट कंपनी का हवाला देते हुए बताया है कि राजनीति में नौकरी या करियर की तलाश कर रहे लोगों में पुरुषों की दिलचस्पी महिलाओं के मुकाबले ज्यादा है। यह सर्वे भारत में हाल ही में 11 अप्रैल से 19 मई तक सात चरणों में होने वाले आम चुनावों से पहले किया गया है।

सर्वे में हिस्सा लेने वाले 59 प्रतिशत लोगों का मानना है कि राजनीतिक में करियर बनाने को देख रहे व्यक्ति में सार्वजनिक रूप से बोलने यानी भाषण और उसको सही तरीके से प्रस्तुत करने की कला होनी चाहिए। वहीं 53 प्रतिशत लोग राजनीति या उससे जुड़े पेशों में करियर बनाने की देख रहे व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता और संघर्ष करने की शक्ति होने को प्रमुख मानते हैं। यहीं नहीं इन 53 प्रतिशत लोगों का मानना है कि पूर्णकालिक नेता बनने के लिए उस व्यक्ति में प्रबंधन का कौशल होना आवश्यक है।

वहीं सर्वे में शामिल हुए लोगों में 24 फीसदी ने परंपरागत राजनीति में जाने की रुचि दिखाई वहीं 21 प्रतिशत लोग ऐसे थे जिन्होंने राजनीति से जुड़े पेशे राजनीतिक विश्लेषक में रुचि दिखाई। वहीं 34 फीसदी लोगों ने सरकार द्वारा समाजिक सेवाओं के लिए चलाए जा रहे संस्थानों और राजनीतिक पत्रकारिता को अपने करियर विकल्प के तौर पर चुना।

यहीं नहीं इंडीड के सर्वे में शामिल हुए लोगों ने राजनीति या उससे जुड़े पेशों में काम करने के लिए आवश्यक गुणों को भी बताया। आधे लोगों ने कहा नौकरी के लिए नेतृत्व और प्रबंधन कौशल का गुण होना आवश्यक है। वहीं 49 प्रतिशत वे लोग जो मानते हैं कि व्यक्ति में अपने दर्शकों को समझने की कला होनी चाहिए।

वहीं सर्वे में शामिल 37 प्रतिशत लोगों का कहना था कि राजनीति में काम करने के लिए संकट प्रबंधन और समस्या को सुलझाने की कला होनी चाहिए। इसके में मुकाबले में 47 प्रति लोगों का मानना था कि राजनीति में जाने के इच्छुक व्यक्ति में विश्लेषण करने की क्षमता बहुत जरूरी है।

जॉब साइट इंडीड ने अपना यह सर्वे इसी साल 22 से 25 फरवरी के बीच किया है। इस पूरे सर्वे में देश के अलग-अलग हिस्सों से 22 से 36 की उम्र के 1201 लोगों ने हिस्सा लिया है। जिसके आधार पर यह आंकड़ा बताया है।

राजनीति से जुड़े पेशों की ओर युवाओं में झुकाव की वजह-

राजनीति या उससे जुड़े पेशों में झुकाव की वजह देश में तेजी से बढ़ती बेरोजगारी है। मोदी सरकार के कार्यकाल की बात करें तो पिछले पांच सालों में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा है। नेशन सैंपल सर्वे ऑफिस की रिपोर्ट को देंखे तो सत्र 2017-18 में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी रही है। जो 45 साल में सबसे अधिक है। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि आखिरी बार बेरोजगारी की दर 1971-72 में सबसे ज्यादा थी। पूर्व यूपीए सरकार के 2011-12 के साल में बेरोजगारी की दर 2.2 फीसदी थी।

दरअसल देश में सरकारी सेक्टर में नौकरियों का आभाव है। पद खाली होने के बावजूद भरे नहीं जा रहे हैं। वहीं जिस संख्या में युवा ग्रेजुएट या किसी अन्य कोर्स की डिग्री लेकर निकल रहे है ऐसे में सभी को प्राइवेट कंपनियों में जॉब मिलना असंभव हो गया है। हाल ही में रिपोर्ट सामने आई है कि आर्थिक तंगी से जूझ रही बीएसएनएल और एमटीएनएलल जैसी कंपनियां बड़े पैमाने पर अपने कर्मचारियों की छटनी करने वाली हैं।

ऐसे में युवाओं के सामने ये संकट खड़ा हो गया है। कि वह प्रोफेशन के तौर पर किस कोर्स को चुनें। अब आपके मन में सवाल आएगा की राजनीति में युवाओं के झुकाव की वजह क्या है। तो वो ये है कि भारत में लोकतंत्र जिस तरीके से विकसित हो रहा है। ऐसे में परंपरागत राजनीति और उससे जुड़े पेशों में करियर की संभावना ज्यादा है।

भारत में न्यूज चैनलों, अखबार, मैगजीन और डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में ऐसे युवा जिन्हे राजनीति में दिलचस्पी है और देश की जनता की भावना को समझने का हुनर है। वो राजनीतिक विश्लेषक या राजनीतिक पत्रकार जेसों पेशों में फिट हो सकते हैं।

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पर राजनीति में करियर बनाना इतना नहीं आसान-

दरअसल वो युवा जिसके परिवार का राजनीति से ताल्लुक नहीं है, राजनीति से जुडे पेशों जैसे मीडिया से ताल्लुक नहीं है उसके लिए नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, राजनीतिक विश्लेषक या फिर राजनीतिक पत्रकार के रूप में खुद को स्थापित करना इतना आसान नहीं है।

दरअसल भारत में वंशवाद की जड़े अगर कहीं सबसे ज्यादा अंदर तक धंसी हुई है तो वो राजनीति का ही क्षेत्र है। देश की किसी भी बड़ी राजनीतिक पार्टी चाहे बीजेपी हो कांग्रेस उनमें शामिल बहुत कम ही ऐसे युवा होते हैं जो राजनीतिक रूप से बड़ा नाम बन पाते हैं।

हमारे देश में कई ऐसी पार्टियां है जिनमें वंशवाद उनकी जड़ में समाया हुआ है। या यूं कहें कि उनका पूरा स्वरूप ही परिवार आधारित है। ऐसे में इन पार्टियों के भीतर किसी आम कार्यकर्ता का पार्टी के शीर्ष पद पर काबिज होना असंभव होता है।

राजनीति से इतर उससे जुड़े पेशों की बात करें तो जो युवा राजनीतिक विश्लेषक या राजनीतिक पत्रकार के रुप में अपने करियर बनाने की सोचता है उसे कहीं न कहीं भाई भतीजावाद, नेपोटिज्म, जातिवाद जैसे कई समस्यों से जूझना पड़ता है। लेकिन राजनीतिक पार्टियों के मुकाबले मी़डिया में अभी यह स्थिति नहीं है।

ऐसे में अगर आप युवा हैं और परंपरागत राजनीति या राजनीति से जुड़े पेशों को अपनाने की सोच रहे हैं, तो आप तभी जाएं जब ये फैसला आपका अपना हो, किसी के द्वारा थोपा न गया हो। क्योंकि राजनीति या उससे जुड़े पेशों में मुकाम हासिल करने के लिए आपक नफा नुकसान की सोचे बजाए उतरना होगा। तभी आप परंपरागत राजनीति या उससे जुड़े पेशों में बेहतर कर सकते हैं।