PM मोदी की उज्ज्वला योजना में 500 करोड़ का घोटाला-विज्ञापन के नाम पर भर दिया खास लोगों का खजाना

New Delhi : सरकार चाहे किसी की भी रहे हमारा सिस्टम गड़बड़ियां करने से बाज नहीं आता। आज हम आपको मोदी सरकार में हो रही एक ऐसी गड़बड़ी के बारे में बताएंगे जिसपर आपका ध्यान अभी तक नहीं गया होगा। प्रधानमंत्री ने गरीबों को गैस कनेक्शन के लिए जो उज्ज्वला योजना शुरू की थी..उस योजना में कैसे हमारा सिस्टम मनमानी करके अपनो खास लोगों की जेब भर रहा है…आज आप इसके बारे में पढिए।

क्या है मामला :

दरअसल आपने जगह जगह उज्ज्वला योजना के होर्डिंग पोस्टर तो लगे देखे ही होंगे। नियमों का उल्लंघन करके इन होर्डिंग्स को लगाने का काम एक ऐसी कंपनी को दिया जा रहा है जो इसके लिए पात्र ही नहीं है। पिछले तीन साल से इंडियन ऑयल ने 4-5 लोगों द्वारा बनाई गई एक आउटडोर एडवर्टाइजमेंट कंपनी US Advertising को ठेका दे रखा है।

छोटी सी कंपनी को दो बार मनोयन के आधार पर दिया ठेका :

दरअसल, दिल्ली में एक छोटी सी विज्ञापन कंपनी है जिसका नाम है US Advertising। 2016 में पहली बार जब उसे ठेका दिया गया तो दिल्ली के द्वारका में 4-5 लोग मिलकर उसे चलाते थे। इस कंपनी को इंडियन ऑयल ने मनोयन के आधार पर बिना किसी टेंडर दस्तावेज के पिछले ढ़ाई सालों से अभियान के प्रचार के लिए ठेका दिया हुआ है। हालांकि दो बार मनोयन के आधार पर काम देने के बाद तीसरी बार टेंडर निकाला गया।

दो बार बड़ी-बड़ी कंपनियों को पूछा तक नहीं :

इंडियन ऑयल ने दो बार US Advertising को ठेका दिया लेकिन इस दौरान देश की सबसेबड़ी कंपनियों की अनदेखी की गई। दोनों बार बड़ी कंपनियों से इस ठेके के लिए ना तो प्रस्ताव लिया गया ना ही कोई सूचना दी गई। अधिकारियों ने चुपके से दोनों बार मनोयन के आधार पर US Advertising को ठेका दे दिया । छोटी सी कंपनी को लगभग 500 करोड़ का काम : बड़ी-बड़ी कंपनियों से तो बात तक नहीं की गई लेकिन इस छोटी सी कंपनी को दो बार के लिए पूरे 500 करोड़ का काम दिया गया। नियमों के अनुसार इतनी बड़ी रकम का काम तो बिना टेंडर नहीं दिया जाता। मतलब ये कंपनी पिछले ढाई सालों से मलाई मार रही है। US Advertising को पिछले दो साल तक एकतरफा मनमाना पैसा दिया गया जो सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का उल्लघंन है।

Modi Government

तीसरी बार निकाला टेंडर :

बार-बार एक ही कंपनी को ठेका दिए जाने का जब विरोध होने लगा तो इंडियन ऑयल ने तीसरी बार होर्डिंस लगाने के लिए टेंडर मंगवाए। जिसमें देश की टॉप कंपनियों ने भी भाग लिया। हद तो तब हो गई जब तीसरी बार भी US Advertising को ठेका देने के लिए नियमों को ही बदल दिया गया।

तीसरी बार टेंडर नीलामी में क्या हुआ :

इंडियन ऑयल द्वारा जब जब योजना के प्रचार के लिए टेंडर के आवेदन मांगे गए तो इसमें कई बड़ी कंपनियों ने भी भाग लिया लेकिन इंडियन ऑयल ने नियमों को ही बदल दिया। इस टेंडर के लिए कई प्रतिष्ठित और बड़ी कंपनियों ने भाग लिया था और जब निविदा जारी की गई तो उसमें US Advertising के लिए नियम और शर्तें ही बदल दी गईं। टेंडर प्रकिया के पहले दौर में तीन कंपनियां पास हुईं, US Advertising, साइनपोस्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, और लक्ष्य मीडिया लिमिटेड। इस दौर में आउट डोर मीडिया बिजनेस की कई औ अन्य बड़ी आउटडोर एडवर्टाइजमेंट कंपनियों को छोड़ दिया गया था। तकनीकी राउंड के माध्यम से उपरोक्त तीन कंपनियों के पास होने के बाद वित्तीय राउंड एल1 और एल 2 को कॉन्ट्रेक्ट देने के लिए निर्णायक होना चाहिए था (ऐसा कहा गया कि टेंडर को दो भाग यानी 70:30 में दिया जाएगा। एक और बात जो परेशान करने वाली थी वो यह कि इस विभाजन के बारे में कुछ बताया नहीं गया था कि कैसे अंत में इस मैजिकल फॉर्मूला के आधार पर टेंडर दिया जाएगा) अनियमितता का एक और बड़ा पहलू उजागर हुआ जब असल कॉनट्रेक्टर ने मनमाने ढंग से यूएस विज्ञापन को एल 1 के रूप में बिजनेस को मूल राशि 293.31 करोड़ (जीएसटी सहित) रुपए की तुलना में 3.7% का भाव देने को तैयार हुआ।

इंडियन ऑयल ने नहीं दिया जवाब :

जब इस पूरे मामले को लेकर हमने इंडियन ऑयल के अधिकारियों से संपर्क किया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं कंपनी के अधिकारी भी फोन उठाने से बचते नजर आए।