रोहिंग्या के साथ नरसंहार वाली रिपोर्ट को म्यांमार ने नकारा, कहा- बेबुनियाद है UN का आरोप

New Delhi. म्यांमार सरकार ने अपने देश की आर्मी पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगाए जा रहे आरोपों का खंडन किया है। म्यांमार का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र के उस रिपोर्ट में कोई भी सच्चाई नहीं है, जिसमें निर्दोषों के नरसंहार की बात कही गई थी।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार ईकाई ने कहा था कि पिछले साल अगस्त में म्यांमार के रखाइन प्रांत में वहां की सेना ने रोहिंग्या समुदाय के मुसलमानों के खिलाफ नरसंहार किया था। इसपर संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि म्यांमार के सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ नरसंहार करने का अभियोग लगाकर मुकदमा चलाना चाहिए। इस पर म्यांमार की सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।

सरकार ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र म्यांमार पर बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। सरकार के प्रवक्ता जॉ हताई ने कहा है कि हम सीधे तौर पर मानवाधिकार कौंसिल के इन आरोपों को खारिज करते हैं। म्यांमार में मानवाधिकारों की पड़ताल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार परिषद ने मार्च 2017 में एक कमिटी बनाई थी। लेकिन, म्यांमार ने इस कमेटी के सदस्यों को म्यांमार में प्रवेश पर रोक लगा दी।

म्यांमार का कहना है कि जब संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने म्यांमार के भीतर कदम ही नहीं रखा तो यह रिपोर्ट एकतरफा कहा जा सकता है। म्यांमार सरकार का कहना है कि देश में मानवाधिकार को लेकर सख्त कानून हैं। अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के आरोपों का जवाब देने के लिए देश में आंतरिक जांच कराई जा रही है। सरकार ने इस साल के आरंभ में ही चार सदस्यों की टीम के द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन की जांच कराई थी।

म्यांमार एक बौद्ध धर्म बहुसंख्यक राष्ट्र है। यहां के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या समुदाय के मुसलमान रहते हैं। बौद्ध धर्मावलंबियों और रोहिंग्या समुदाय के बीच आए दिन तनातनी की खबरे सामने आती रहती हैं। पिछले साल कथित तौर पर रोहिंग्या समुदाय के कुछ लोगों ने वहां की सेना पर हमला कर दिया था। इसके बाद सेना ने बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की, जिससे लाखों लोगों ने म्यांमार छोड़कर दूसरे देशों में शरण ली है।