मंत्रालयों की आपत्तियों के बावजूद सरकार ने जियो इंस्टिट्यूट को दिया उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा

New Delhi: रिलायंस के जियो इंस्टिट्यूट को उत्कृष्ट संस्थानों की श्रेणी में रखे जाने को लेकर अभी विवाद कम नहीं हुआ है। पिछले दिनों एक अंग्रेजी दैनिक अख़बार द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत सरकार द्वारा 9 जुलाई को जारी किए गए देश के 6 श्रेष्ठ संस्थानों की सूची के संदर्भ में जानकारी एकत्रित की गई। RTI से मिली इन जानकारियों के अनुसार, इन श्रेष्ठ संस्थानों में रिलायंस समूह के प्रस्तावित संस्थान ‘जियो इंस्टिट्यूट’ को शामिल किए जाने को लेकर इसमें शामिल प्रमुख मंत्रालयों-वित्त मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने अपनी कड़ी आपत्तियां दर्ज करवाईं थीं।

RTI से मिली जानकारी के अनुसार आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि इस संबंध में वित्त मंत्रालय ने अपना रुख साफ करते हुए कड़ी आपत्तियां दर्ज करवाईं थीं, लेकिन उसे दरकिनार करते हुए सरकार द्वारा अपने पूर्व योजना और इसके लिए किए गए इरादे के आधार पर श्रेष्ठ संस्थानों का चयन किया गया। रिलायंस समूह के प्रस्तावित ‘जियो इंस्टिट्यूट’ जो अभी सिर्फ कागज़ातों पर ही विद्यमान है, को इन श्रेष्ठ संस्थानों की सूची में शामिल किए जाने को लेकर वित्त मंत्रालय सरकार से बिल्कुल अलग राय रखता था।

पिछले साल MHRD ने ग्रीनफील्ड श्रेणी पर एक्सपेंडीचर फाइनेंस कमिटी(EFC) द्वारा लिखे गए एक नोट पर प्रतिक्रिया व्यक्त की थी जिसके जवाब में व्यय विभाग (Departmment of Expenditure) ने 23 फरवरी 2017 को लिखा कि ऐसे निजी संस्थान जो अभी धरातल पर नहीं हैं, सिर्फ कागजातों में ही विद्यमान हैं, को श्रेष्ठ संस्थानों की श्रेणी में रखना तर्कसंगत नहीं है और न ही हम इसका समर्थन करते हैं।

डिपार्टमेंट आफ एक्सपेंडीचर (DoE) ने अपने पांच पन्नों के इस नोट में लिखा कि गैर-विद्यमान संस्थानों को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा देने की यह पद्धति, सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों से कहीं ज़्यादा निजी संस्थानों को उनकी ब्रांड वैल्यू बढ़ाने में मदद करेगी। इसलिए यह तरीका गैर-लोकतांत्रिक है और हमारे शिक्षा के पारिस्थितिक तंत्र को ध्वस्त करने वाला है। केवल अपनी योजना और इरादे के आधार पर किसी संस्थान को उत्कृष्ट संस्था का दर्जा देना निंदनीय है।