पश्चिम बंगाल में नहीं लागू होगा गरीब सवर्णों के आरक्षण का कानून, SC के फैसले का इंतजार करेंगी ममता

New Delhi: गरीब सवर्णों के आरक्षण का लाभ पाने के लिए फिलहाल पश्चिम बंगाल के नागरिकों को थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा। दरअसल ममता बनर्जी का कहना है कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेंगी।

ममता बनर्जी सरकार सवर्ण आरक्षण कानून को राज्य में लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करेगी। फिर इसके बाद आरक्षण को लागू करेंगी। दरअसल जब से केंद्र की मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने की घोषणा की है, तभी से ममता बनर्जी की पार्टी इस कानून की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठा रही है।

ममता बनर्जी ने हाल ही में एक प्रशासनिक बैठक के दौरान मोदी सरकार के इस फैसले से समान्य वर्ग के लोगों के प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की। बनर्जी ने कहा कि इससे आर्थिक रुप से पिछड़े वर्ग से आने वाले सामान्य वर्ग के बच्चों के लिए नौकरी और शिक्षा में पहले की तुलना में अवसर मिलने कम हो जाएंगे।

Mamata Banerjee

मुख्मंत्री ने कहा कि गरीब तबके के हर व्यक्ति की पहली प्रतिस्पर्धा उससे होगी जो प्रतिमाह 60 हजार से ज्यादा रुपए कमाता है। ऐसे में किसान के बेटे को कैसे नौकरी मिलेगी। सोमवार को बुलाई गई एक उच्च स्तरीय बैठक में कई अहम मसलों पर चर्चा हुई थी। हालांकि बंगाल के शिक्षामंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा कि इस बैठक में सवर्ण आरक्षण पर कोई चर्चा नहीं हुई।

चटर्जी ने कहा कि हमने अभी कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। फिलहाल हम सवर्ण आरक्षण कानून पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। इस पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। अधिकारी ने कहा कि हम फैसले का इंतजार करेंगे क्योंकि बनर्जी लगातार इसकी वैधता पर सवाल उठाती रही हैं।