कम बोलने वाले इस नेता का करियर रहा बेदाग, जानें एक अर्थशास्त्री के PM बनने की कहानी

New Delhi. मनमोहन सिंह को एक कम बोलने वाले राजनेता के तौर पर जाना जाता है। अर्थशास्त्री से प्रधानमंत्री तक का सफर तय करने वाले मनमोहन सिंह देश के उन चंद नेताओं में शुमार हैं, जिन्हें राजनीति में एक सम्मान की नजर से देखा जाता है।

इस लेख में हम पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जीवन से जुड़ी बातें समझने की कोशिश करेंगे।

मनमोहन सिंह का जन्म ब्रिटिश भारत (अब के पाकिस्तान) के पंजाब प्रांत में 26 सितंबर 1932 को हुआ था। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत चला आया। यहां उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से अपनी परास्नातक तक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे शोध करने कैंब्रिज विश्वविद्यालय चले गए और पीएचडी हासिल की। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डी. फिल की उपाधि ली।

लंदन से लौटने के बाद मनमोहन सिंह पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्राध्यापक भी रहे। साल 1971 में मनमोहन सिंह को भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया गया।

1972 में उन्हें वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बनाया गया। इसके बाद के सालों में उन्हें योजना आयोग का उपाध्यक्ष, रिजर्व बैंक का गवर्नर और प्रधानमंत्री का आर्थिक सलाहकार बनाया गया। मनमोहन सिंह विश्वविद्यालय योजना आयोग के अध्यक्ष भी रहे हैं।

राजनीतिक जीवन

साल 1985 में राजीव गांधी के शासन काल में मनमोहन सिंह को योजना आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद साल 1990 में उन्हें प्रधानमंत्री का आर्थिक सलाहकार बनाया गया। राजीव गांधी के बाद सत्ता में आए पी.वी नरसिम्हा राव ने मनमोहन सिंह को अपने मंत्रिमंडल में वित्त मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार दिया।

1998 से 2004 तक वह राज्यसभा में विपक्ष के नेता थे। 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर पेश किया। इस चुनाव में प्रतिद्वंदी बीजेपी को कड़ी टक्कर मिली और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया गया।

इसके बाद साल 2009 के लोकसभा चुनाव में भी वे यूपीए के उम्मीदवार रहे और पार्टी की जीत के बाद दोबारा प्रधानमंत्री बनाए गए। मनमोहन सिंह को देश की राजनीति में एक कम बोलने वाले नेता के तौर पर जाना जाता है, जिनका राजनीतिक जीवन बेदाग रहा है। विरोधी दल के लोग मनमोहन के कम बोलने की आदत पर तंज कसते रहे हैं।

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