दांतेवाड़ा जेल प्रशासन की पहल- कैदियों को किया जा रहा शिक्षित, रोजगार को भी दिया जा रहा बढ़ावा

New Delhi: छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा जेल प्रशासन की तरफ से कैदियों को शिक्षित करने के लिए शानदार पहल चलाई जा रही है। कैदियों को न सिर्फ शिक्षित ही किया जा रहा है बल्कि उनको तकनीक का भी ज्ञान दिया जा रहा है। इसके साथ ही उनके भीतर रोजगार की भावना को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

दांतेवाड़ा जेल प्रशासन की ओर से शुरू की गई इस अनूठी पहले को कई पुरस्कार मिले हैं। साथ ही इसकी तारीफ की गई है। दांतेवाड़ा जेले के अधीक्षक गोवर्धन सिंह सूरी ने इस पहल के बारे में बताते हुए कहा कि हमने साल 2016 में इस पहल को जेल में शुरू किया था। इस पहल को शुरू करने के पीछे का कारण यह था कि उस में जेल में मौजूद आधे से ज्यादा कैदी पढ़े लिख नहीं थी। जिसके बाद हमने उन्हें शीक्षित और जागरूक करने का सोचा और इस पहल की शुरूआत की।

जेल अधीक्षक गोवर्धन सिंह सूरी ने आगे बताया कि जब हमने इस पहल की शुरूआत की तो आधे से ज्यादा कैदी पढ़े लिखे नहीं थे। उन्हें शिक्षित करने में हमें आठ महीने लग गए। हालांकि अब जब जेल में साक्षरता का स्तर बढ़ गया है तो बाकी कैदियों को पढ़ाना आसान हो गया है। नए कैदियों को 4-5 दिनों में शुरूआती शैक्षिक जानकारी हो जाती है।

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जेल अधीक्षक ने बताया कि समय के साथ जेल की हर बैरक में ऐसे लोगों को नियुक्त किया गया है जो नियमित रूप से कैदियों को पढ़ाते हैं। जेल में आने वाले नए कैदियों को पहले दिन से ही शीक्षित करने का काम शुरू कर दिया जाता है। कैदियों को डिजिटल और तकनीक की शिक्षा देने के पीछे के कारण को बताते हुए जेल अधीक्षक सूरी ने बताया कि हम इसलिए ऐसा कर रहे हैं कि जेल से निकलने के बाद उनके जीवन को रोजगारपरक बनाया जा सके। जिससे वो आत्मनिर्भर बनें और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं।

गोवर्धन सिंह सूरी ने बताया कि हम कैदियों को केंद्र सरकार द्वारा चलाए जा रहे डिजिटल इंडिया प्रोग्राम के तहत कंप्यूटर की जानकारी दे रहे हैं। इसके तहत कैदियों को कंप्यूटर की बेसिक जानकारी दी जा रही है। लगभग एक हजार कैदियों ने डिजिटल साक्षारता कार्यक्रम के तहत रजिस्ट्रेशन किया था। जिसमें 500 से अधिक लोगों ने ऑनलाइन परीक्षा दी है। जेल अधीक्ष ने बताया कि हम कैदियों को एक प्रमाणपत्र भी देतें हैं जो बुनियादी पाठ्क्रम को मंजूरी देता है।