श्री श्री रविशंकर के नाम पर ओवैसी को ऐतराज,बोले-रहना होगा निष्पक्ष,उम्मीद है समझेंगे जिम्मेदारी

New Delhi: आज यानि की 8 मार्च को अयोध्या भूमि विवाद में मध्यस्थता को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अयोध्या मामले में SC ने मध्यस्थता की प्रक्रिया को गुप्त रखने का आदेश दिया है। अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता का आदेश दिया। SC ने जस्टिस इब्राहिम खफीउल्लाह और रविशंकर को मध्यस्थ बनाया।

इस दौरान AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी श्रीश्री रविशंकर के नाम पर आपत्ति जताई है। हालांकि, उन्होंने बाकी दोनों के नामों पर कोई बयान देने से परहेज है। ओवैसी ने कहा कि अब चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है, तो अब श्रीश्री रविशंकर को निष्पक्ष रहना होगा। उम्मीद है कि मध्यस्थ अपनी जिम्मेदारी समझेंगें।

वहीं इस सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद बीजेपी नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि कोर्ट ने मध्यस्थता कमेटी गठित है। यह कुछ मापदंडों के तहत काम करता है। बाबरी मस्जिद बनने से पहले वहां राम मंदिर था। अगर राम वहां पैदा हुए थे तो मुझे वहां प्रार्थना करने का मौलिक अधिकार है। विवादित जमीन पर मंदिर बनना है। क्या इसके बगल में मस्जिद बनाई जा सकती है? मेरा जवाब है- नहीं। मस्जिद कहीं भी बनाई जा सकती है।

वहीं केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा कि विवादित जगह पर केवल राम मंदिर ही बन सकता है, कुछ और नहीं बनाया जा सकता। यह अच्छा है कि सभी पक्षों को चर्चा करनी चाहिए और फैसला करना चाहिए, फिर राम मंदिर का निर्माण शुरू होना चाहिए। फैजाबाद और अन्य क्षेत्रों में कई मस्जिद हैं, विवादित स्थल पर केवल मंदिर का निर्माण किया जाएगा

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SC ने कहा 4 हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट और 8 हफ्ते में अंतिम रिपोर्ट। वहीं मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि बातचीत से ये मामला हल हो जाए तो बेहतर है। हम मामले में फैसला चाहते। वहीं दूसरी तरफ हिंदू महासभा के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि हमें नहीं लगता कि मध्यस्थता के माध्यम से इस मामले का हल किया जा सकता है, लेकिन चूंकि माननीय अदालत ने एक प्रक्रिया रखी है। हम इंतजार करेंगे और देखेंगे।

राम मंदिर में 3 मध्यस्थों की टीम गठित की गई है। पैनल को 4 हफ्तों में रिपोर्ट सौंपनी हैं। साथ ही इस सुनवाई के दौरान मीडिया पर बैन लगेगी। मध्यस्था में मीडिया रिपोर्टिंग नहीं होगी। जिससे सुनवाई को दौरान किसी तरह की दखल ना हो।

इनपुट-ANI